कांग्रेस तुम्हे "प्रियंका" चाहिए,बिलकुल वेसे जैसे डूबते को तिनका चाहिए,कांग्रेस लगभग डूब चुकी है और आगे भी डूब हो रही है,पीछे भी विधानसभा में भी लोकसभा में भी अब इसकी वजह बताइये?नही पता?इसकी सीधी वजह है कांग्रेस के पास "नेता" न होना,जी हां कांग्रेस के पास राहुल है,दिग्विजय है,ग़ुलाम नबी आज़ाद है लेकिन 'नेता' नही,मगर सारी उम्मीद भी नही खोयी है अभी उसके पास 'प्रियंका' है.
कांग्रेस बेशक डूबता जहाज़ है लेकिन ये जहाज़ बच सकता है अगर इसका कप्तान प्रियंका बने,प्रियंका वही जो नरेन्द्र मोदी को उनके उम्मीदवारी पद की गरिमा का ध्यान रखने की बात दो टूक कहती है,वही जो डूबता चुनाव अपने दम पर बाहर निकाल कर लाती है और वही प्रियंका जो 'वरुण' को आगाह करती है,ये उदाहरण काफी है इंदिरा की पोती और एक मंझी हुई नेताओं की खूबी का बखान करने के लिए.
असल में कांग्रेस की हार की वजह सिर्फ उसकी नीतियाँ ही है, जिसमें राहुल को ऐसा नेता बना लेना है जो सिर्फ जीत का जिम्मेदार है और इस चीज़ को कवर करने के लिए प्रियंका की रामबाण का काम कर चुकी है,लेकिन शायद कांग्रेस प्रियंका से डरती है?कि कहि उनका व्यक्तित्व राहुल को खत्म न कर दें? और ये नही तो क्या वजह है प्रियंका की देहलीज़ या यानी अमेठी और रायबरेली की?
बरहाल प्रियंका की अहमियत क्या है वो एक या दो जनसभा में अपनी खरी,एकटक और झुझारू और एक चोटी के नेता जैसा बयान देकर दिखा दिया है,और कांग्रेस को चाहिए की इस बार जुआ खेलें यूपी में और वो जुआ हो प्रियंका के नाम का क्योंकि अगर इस जुए का दांव सही बैठा तो 27 साल का सूखा खत्म होगा और साथ में कांग्रेस को "नेता" भी मिला जायगा,जिसकी उसे बहुत जरूरत है.
लेकिन जिस कांग्रेस को अब भी प्रियंका की अहमियत समझ नही आ रही उसी के अमरिंदर सिंह जैसे क्षेत्रीय नेता समझ रहे है और पंजाब में चुनाव प्रचार को बात कर रहे है और शायद ऐसा हो जाये?क्योंकि ऐसा होना सियासत को रोमांचित कर देगा,बहुत कर देगा...
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