शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

सियासत में सोनिया होना आसान नही..

सियासत में बहुत कुछ होता है,विवाद,विचारधारा सत्ता ,विपक्ष और दल लेकिन नही होता है तो शायद "सोनिया" नही होती,राजीव की बीवी,इंदिरा की बहुं राहुल की माँ और कांग्रेस की गॉडफादर सोनिया गाँधी एक ऐसी शख़्सियत है जो अपने सिद्धांतों के लिए प्रधान मंत्री पद जैसा अमूल्य पद तक त्याग चुकी है,इसलिए इन्हें 2004 में कांग्रेस को करिश्माई बढ़त दिलाने के बाद एक वरिष्ठ पत्रकार ने "भारत माता" तक का ख़िताब किया था.

सोनिया गांधी वही थी जो 1984 में इंदिरा गांधी के हत्या के बाद अपने पति के साथ खड़ी थी एक बीवी बनकर,91 में राजीव गांधी की हत्या के बाद अपने यतीम हुए बच्चों को सम्भाल रही थी एक माँ  बनकर,और 99 में कांग्रेस की बागडोर पूरी ईमानदारी से सम्भाल रही थी एक नेता बनकर और ये सोनिया गांधी का जादुई करिश्मा था कि भाजपा का "शाइनिंग इंडिया भी मार खा गया.

सोनिया कभी भी पार्टी से अलग नही रही समय बुरा हो या भला हो सोनिया हमेशा कांग्रेस के लिए रही एक नेता की तरह और बड़े की तरह है,और सोनिया की हैसियत भी यही है,सोनिया 2004 की सत्ता से लेकर 2014 के विपक्ष तक कांग्रेस के साथ खड़ी है,कांग्रेस को साथ लेकर चल रही है और इसी को तो नेता कहते है.

सोनिया गांधी ने ही 2004 से लेकर 2014 तक सत्ता में रहने के बाद भी कोई भी पद नही लिए,कोई सरकारी भागीदारी नही ली और कांग्रेस को अपने बच्चे की तरह पाला तभी सियासत में सोनिया गांधी की विरोधी भी तारीफ करते है,विवाद ,आरोप और नाराज़गी अपनी जगह है लेकिन सोनिया गांधी ऐसी शख्सियत है कि उनसे राजनीती के लिए बहुत कुछ सीखा जा सकता है,जभी तो कहा है कि सियासत में 'सोनिया' होना आसान नही होता ...

असद शैख़

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